मेरे साहिब - २
मेरे साहिब - २
तू मैं - माण निमाणी
अरदास करी प्रभू अपने आगे
सुन-सुन जीवाँ तेरी बाणी-२
मेरे साहिब - २
तुद चित आये महा अनन्दा
जिस विसरे सो मर जाये
दयाल होये, जिस ऊप सर ते?
सो तुद सदा धयाये
मेरे साहिब - २
तू मैं - माण निमाणी - २
चरण धूळ तेरे जन की होवाँ
तेरे दरसन को बल जाई
अमरत बचन ह्रदय उर धारी
सौक? पाते सँग पाई
अन्तर की गत तुद? पे सारी
तुद जे वड अवर न कोई
जिसनू लये लहे सो लागे
भगत तुहारा सोई - २
मेरे साहिब - २
तू मैं - माण निमाणी - २
दो कर जोड माँगू इक दाना
साहिब तुठे पावाँ
साँस-२ नानक आराधे
आठ पहर गुण गाँवा-२
मेरे साहिब - २
तू मैं - माण निमाणी - २