जीवन पथ पर शाम सवेरे
छाए हैं घनघोर अंधेरे
_आऽऽ..आऽऽ
ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्षन तेरे
_ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्षन तेरे
जीवन पथ पर शाम सवेरे
_जीवन पथ पर शाम सवेरे
छाए हैं घनघोर अंधेरे
ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्षन तेरे
मैं मूरख तू अन्तर्यामी - 2
मैं सेवक तू मेरा स्वामी
_मैं सेवक तू मेरा स्वामी
काहे मुझसे नाता तोडा
घर छोडा, मन्दिर भी छोडा
कितनी दूर..
कितनी दूर लगाए तूने
जा कैलाश पे डेरे
ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्षन तेरे
तेरे द्वार पे जोत जगाते - २
युग बिते तेरे गुण गाते
_युग बिते तेरे गुण गाते
ना मांगूं मैं हीरे मोती
मांगूं बस थोडी-सी ज्योती
खाली हाथ न जाऊंगा मैं
खाली हाथ न जाऊंगा मैं
दाता द्वार से तेरे
ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्षन तेरे
कब होंगे दर्षन तेरे
हे..
कब होंगे दर्षन तेरे
हे..
कब होंगे दर्षन तेरे
कब होंगे दर्षन तेरे
कब होंगे दर्षन तेरे